''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका

        

Friday, June 16, 2017

'यज्ञ' आग्निहोत्र एवं 'हवन' का साईंटीफिक विवेचन.... वर्षा ऋतु में संक्रमित बिमारियों से बचने का सरल साधन है 'हवन-विधान'...

'यज्ञ' आग्निहोत्र एवं 'हवन' का साईंटीफिक विवेचन.... वर्षा ऋतु में संक्रमित बिमारियों से बचने का सरल साधन है 'हवन-विधान'....

अग्नि भगवान से ऐसी प्रार्थना यजमान करता है कि-
अयन्त इध्म आत्मा जातवेदसे इध्मस्वचवर्धस्व इद्धय वर्धय। -आश्वलायन गृह्यसूत्र 1/10/17

यज्ञ को अग्निहोत्र कहते हैं। अग्नि ही यज्ञ का प्रधान देवता हे। हवन-सामग्री को अग्नि के मुख में ही डालते हैं। अग्नि को ईश्वर-रूप मानकर उसकी पूजा करना ही अग्निहोत्र है।

"अन्तर्नाद" मंच के साथियों नमस्कार/सुप्रभात एक बार राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान द्वारा किये गये एक शोध में पाया गया है कि पूजा —पाठ और हवन के दौरान उत्पन्न औषधीय धुआं हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करता है जिससे बीमारी फैलने की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। और विशेष रुप से अभी वर्षा ऋतु में संक्रमित बिमारियों का अंदेशा बढ जाती है अत: इस दौरान इस हवन-विधान करना चाहिये! और इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा इसको आप हमारे कार्यालय में अपने अनुभवों के बारे में बतायें ताकि हम इस विषय पर और बेहतर तरीके से शोध कर सकें हमारा पता है-  "ज्योतिष का सूर्य" ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, हाऊस नं.-1299, सड़क,- 26, शांतिनगर, भिलाई, दुर्ग छत्तीसगढ़, पिन-490023, mob.No.9827198828 

क्योंकि हवन के पहले और बाद में कमरे के वातावरण का व्यापक विश्लेषण और परीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि हवन से उत्पन्न औषधीय धुंए से हवा में मौजूद हानिकारक जीवाणु की मात्र में 94 प्रतिशत तक की कमी आयी!
इस औषधीय धुएं का वातावरण पर असर 30 दिन तक बना रहता है और इस अवधि में जहरीले कीटाणु नहीं पनप पाते।
धुएं की क्रिया से न सिर्फ आदमी के स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है बल्कि यह प्रयोग खेती में भी खासा असरकारी साबित हुआ है।
वैज्ञानिक का कहना है कि पहले हुए प्रयोगों में यह पाया गया कि औषधीय हवन के धुएं से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक जीवाणुओं से भी निजात पाई जा सकती है। मनुष्य को दी जाने वाली तमाम तरह की दवाओं की तुलना में अगर औषधीय जड़ी बूटियां और औषधियुक्त हवन के धुएं से कई रोगों में ज्यादा फायदा होता है और इससे कुछ नुकसान नहीं होता जबकि दवाओं का कुछ न कुछ दुष्प्रभाव जरूर होता है।
धुआं मनुष्य के शरीर में सीधे असरकारी होता है और यह पद्वति दवाओं की अपेक्षा सस्ती और टिकाउ भी है।http://ptvinodchoubey.blogspot.in
-ज्योतिषाचार्य पण्डित विनोद चौबे, संपादक 'ज्योतिष का सूर्य' भिलाई, दुर्ग, (छ.ग.)