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''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक पत्रिका

        
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Sunday, August 20, 2017

भारतीय स्वतंत्रता १९४७ के तत्क्षण बाद ही हिन्दुओं के साथ बहुत बड़ा षडयंत्र हुआ...

आज सम्पन्न हुए *अन्तर्नाद मंच के वार्षिक समारोह* में प्रथम बार हम सबका आपस में हुए परिचय से मैं अभिभूत हूं l

ग्रुप में कई दिनों से अपने अपने विचारों का आदान-प्रदान हो रहा था, आज प्रत्यक्ष मिलने का अवसर ज्योतिषाचार्य पं. विनोद जी, राजू महाराज, बहन साधना जी, सविता जी तथा और भी महानुभावों की योजना से यह संभव हो सका l

मा. विजय बघेल जी की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ी है l

मैंने अपने अध्ययन और अनुभव के आधार पर देश की स्थिति का वर्णन करने का प्रयत्न किया, हमारी चुनौतियां क्या है? इसे भी बताने का प्रयत्न किया l
संस्कारों का जीवन में कितना महत्व है, इसका उल्लेख करते हुए मुगलों और अंग्रेजों की लंबे समय तक रही गुलामी के कारण हमारे मानस पटल पर उसका आज भी प्रभाव दिख रहा है l घर परिवारों में अच्छे संस्कारों को देने की हमारी भूमिका ज्यादा बढ़ी है l हमारी आनेवाली नयी पीढ़ी को इसके प्रति अधिक सचेत व जागरुक करने का हमारा दायित्व बढ़ा है l

1947 को आजादी के बाद देश की बागडोर संभालने वाले राजनैतिक नेतृत्व ने हम हिन्दुओं के साथ छलावा करते हुए आपस में बांटे रखने का बड़ा षड़यंत्र योजनापूर्वक किया l
किन्तु अनादिकाल से चली आ रही सनातन संस्कृति, परम्परा को अक्षुण्ण बनाकर रखते हुए 2014 में फिर से भारतीय इतिहास का नया अध्याय पुन: स्थापित हुआ l यह हम सबके लिए सौभाग्य की बात है l

पहली बार मिलने के कारण ग्रुप के साथ और भी काफी विषय शेअर करने थे, समय मर्यादा के कारण जितना संभव होना था, वह हुआ l पहली बार मिलने के कारण परिवार भाव की अनुभूति से सबके चेहरे पर खुशियां झलक रही थी l

परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए आशा और विश्वास करता हूं कि, *अन्तर्नाद मंच* की गतिविधियों का विस्तार होते हुए समाजपयोगी कार्य में पूर्ण सफल होगा l

मेरी शुभकामनाएं...

सबका बहुत बहुत आभार, धन्यवाद l

               ~ कनिराम, सह प्रांत प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ प्रांत